शिक्षक दिवस पर मेरे उद्गार

 मुक्तक



शिक्षा हित अपना जीवन समर्पित किया,


ज्ञान जो भी मिला,सबको अर्पित किया।


है नमन शिक्षकों,आप सबको मेरा


ज्ञान अक्षर का दे, मुझसे गर्वित किया।।


 


गणना और सर्वेक्षण सारे करना जिम्मेदारी है,


सहयोग हर विभाग का करना भी लाचारी है।


शिक्षण के हित, समय मिले कम, है यह सच्चाई


वाह वाह शिक्षक अजब किस्मत तुम्हारी है।


 


बन गई पाठशाला है दुकान अब 


हो गई शिक्षा व्यापार सामान अब 


इसलिए मान शिक्षक का अब घट गया 


होता शिक्षक नहीं, कोई भगवान अब।


 


साल में 1 दिन होता गुणगान बस 


बाद में खूंटी पर रखते सम्मान बस 


काम इतने दिए तुमको सरकार ने 


खुद का ही रख न पाते हैं ध्यान बस।


 


शिक्षक को उलझा डाला है पदनामों के जाल में


इसका शोषण होता ही है,हर सूरत हर हाल में


बंधुवा मजदूरों के जैसा इनका हाल बना डाला


उससे ज्यादा काम हो गये,जितने दिन हो साल में।


 


ए सी आफिस में बने योजना, वास्तविक हालातों से दूर


उनको कार्यान्वित करने को,शिक्षक ही होता मजबूर


लक्ष्य कोई हो,पूरा करना,बस इसकी ही जिम्मेदारी


कई विभागों के काम करें, लोग कहें बंधुवा मजदूर।


 


 


शिक्षक कोई मशीन नहीं,न शिक्षण काम मशीनी है,


मन मस्तिष्क से जुड़ा हुआ,यह सच्चाई जमीनी है।


ऐसा करो,करो मत ऐसा,नित नूतन निर्देशों ने


सहज सरल शिक्षण करने,की आजादी छीनी है।


 


 


आनलाइन प्रशिक्षण लेकर, करते आनलाइन शिक्षण 


तकनीकी नूतन अपनायी, आपकी क्षमताओं को नमन।


शिक्षकों की अतुलित क्षमता की,समता कोई न कर पाया


सभी कर्मयोगी शिक्षकों का 'अनिल' कर रहा है वंदन।


 


कैसी भी आपदा आई हो, सबमें राहत का काम करें


हर योजना में रहे सहयोगी, शायद ही आराम करें


कोरोना में भी राहत शिविरों में,सेवा के कार्य किये,


 सेवा भाव को नमन आपके,'अनिल' यहां प्रणाम करें।


डॉ.अनिल शर्मा 'अनिल'


धामपुर उत्तर प्रदेश


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