नमन


मैं नमन करती हूं शिक्षक रूपी उन माता पिता को, जो अपने बच्चों को अच्छे संस्कार और दूसरों का सम्मान करना सिखाते है, लेकिन अपने आत्मसम्मान के लिए लड़ना और गलत का विरोध करना भी सिखाते हैं,


मैं नमन करती हूं सभी शिक्षकों को और अपने आज तक के शिक्षकों को जिन्होंने मुझे और अन्य बच्चों को अपने अनुभव से ज्ञान दिया, सही राह दिखाई और तराशा,


मैं नमन करती हूं अपनों को या अपने उन मित्रों को जिनके अच्छे व्यवहार ने मुझे भरोसा करना सिखाया, की अच्छे लोगों की अभी भी दुनिया में कमी नहीं है,


मैं नमन करती हूं, मेरा दिल दुखाने वालों का भी, जिन्होंने मुझे सिखाया, की तकलीफ से भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है, अपना हुनर बाहर भी लाया जा सकता है,


मैं नमन करती हूं अपनी प्रकृति को, जिससे हम बहुत कुछ सीखते हैं,


मैं नमन करती हूं, जानवरो को; जो आजकल हमें इंसान बनना सिखाते हैं, स्वार्थ से परे होकर दिल से प्यार करना सिखाते हैं,


मैं आखिर में नमन करती हूं, इस संसार और ज़िन्दगी को जिसने हम सबको बहुत कुछ सिखाया और सीखा रहा है।


श्वेता शर्मा,


आगरा, उत्तर प्रदेश,


मौलिक और स्वरचित रचना


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