नादान


हा हम नादान जरूर हैं


पर इतने भी नहीं की


इश्क की गहराई ना 


समझ पाएं


  


सब कहती हैं आंखों


 की नमी तुम्हारी


झिलमिल सी सपनों 


की कुछ टूटे से झलक 


तुम्हारी 


 


हा जानते हैं ना हम


वो नफरत की कुछ 


हलकी सी कसक तुम्हारी


जो तुम हमसे करने की 


दावा करते हों,


 


हा इश्क ही है वो 


जो तुम हमसे बेइंतहा 


करते हो 


 


ना जाने किस मोड़ में मिलेंगे 


मोहब्बत के दो अनजान रास्ते


हम चल तो पड़े है सफ़र पर


मंजिल मिले ना मिले हम जाएंगे 


जरूर इश्क की गुमनाम रास्ते 


 


हा हम नादान जरूर हैं


पर इतने भी नहीं की


इश्क की गहराई 


ना समझ पाएं


 


 सरिता लहरे "माही"


जशपुर (छत्तीसगढ)


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