कोविड 19 से बचाव के प्रोटोकोल के साथ काम करने को दिया गया प्रशिक्षण


 विशेषज्ञों ने फ्रंटलाइन वर्कर्स को वेबीनार में वर्तमान चुनौतियों और उनके समाधान की दी जानकारी


यूनिसेफ, यूपीटीएसयू व सीफार के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग के तत्वाधान में आयोजित हुई कार्यशाला  


बलरामपुर । कोरोना वायरस या कोविड-19 के दौर में भी मातृ स्वास्थ्य, शिशु प्रजनन व पोषण संबंधी स्वास्थ्य सेवाओं को समुदाय तक पहुंचाने के साथ ही इस आपदा से निपटने को लेकर लोगों को जागरूक करने में जुटीं फ्रंटलाइन वर्कर, आशा संगिनी व एएनएम के लिए जिले में एक वर्चुअल कार्यशाला का आयोजन किया गया। स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में हुई इस कार्यशाला में यूनिसेफ, उत्तर प्रदेश तकनीकी सहयोग इकाई (यूपीटीएसयू) व सेंटर फोर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) सहयोगी की भूमिका में थे। कार्यशाला में फ्रंटलाइन वर्कर्स को वर्तमान चुनौतियों से निपटने के गुर सिखाये गए। 


शुक्रवार को जिले में फ्रंटलाइन वर्कर के साथ कोविड 19 एवं आरएमएनसीएच व पोषण सेवाओं संबंधी संचार चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बीसीसी कार्ययोजना बनाने के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिले में आयोजित इस संचार संवाद कार्यशाला का शुभारंभ प्रभारी जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी अरविंद मिश्रा ने सभी का स्वागत और परिचय के साथ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. अरूण कुमार ने आशा, आशा संगिनी और एएनएम को कोरोना काल में स्वास्थ्य सेवाओं का महत्व समझाते हुए कहा कि हमारे फ्रंटलाइन वर्कर स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ है जिनकी वजह से हमारी स्वास्थ्य सेवाएं और योजनाओं की जानकारी समुदाय तक पहुंच रही है। ऐसे में आवश्यक है कि हम कोरोना काल में कैसे अपने को सुरक्षित रखते हुए समुदाय के स्वास्थ्य और उन तक पहुंचने वाली सेवाओं का ध्यान रखें।


यूपीटीएसयू की संचार विशेषज्ञ ने बताया कि कोरोना के दौरान ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस (वीएचएनडी), गृह आधारित नवजात देखभाल (एचबीएनसी), परिवार नियोजन, टीकाकरण सहित सभी स्वास्थ्य सेवाएँ स्थगित कर दी गयीं थीं जिन्हें फिर से नए दिशा निर्देशों के साथ शुरू किया गया है। उन्होंने कहा वीएचएनडी, गृह भ्रमण और एचबीएनसी के दौरान आप सभी को कोविड से बचाव के सभी प्रोटोकोल का पालन करना है। परिवार के सदस्यों को घर से बाहर आवाज देकर बुलाना है और बाहर ही बात करनी है। कन्टेनमेंट जोन में सत्र का आयोजन नहीं करना है। जिन घरों में कम वजन का बच्चा हुआ हो, समय पूर्व बच्चे का जन्म हुआ हो, बच्चा एसएनसीयू से वापस आया है या घर में ही प्रसव हुआ हो उन घरों में एचबीएनसी सेवाओं को प्राथमिकता देनी है। वेबिनार को सम्बोधित करते हुए यूनिसेफ से दयाशंकर सिंह ने कोविड को लेकर जो भ्रांतियां और भेदभाव हैं, उस पर चर्चा करते हुए कहा कि इनको दूर करने में फ्रंट लाइन वर्कर्स की अहम भूमिका है। वह समाज में इस पर अवश्य चर्चा करें और केवल तथ्यात्मक संदेशों को ही समुदाय तक पहुंचाएं। सीफार की नेशनल प्रोजेक्ट लीड रंजना द्विवेदी ने स्वास्थ्य संचार के महत्त्व को बताते हुए कहा कि कोविड के साथ-साथ प्रजनन, मातृ-शिशु, नवजात, किशोर स्वास्थ्य के अलावा पोषण के स्वास्थ्य संदेशों को समुदाय तक इस तरह पहुँचाना है कि वह इन सेवाओं को लेने के लिए स्वयं आगे आयें। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संचार को रोचक बनाना होगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग लाभांवित हो सकें। कार्यक्रम के अंत में आयोजित खुले सत्र में फ्रंट लाइन वर्करों ने विशेषज्ञों से तमाम सवाल जवाब भी किये। पचपेड़वा ब्लाक के ग्राम कोहरगड्डी की एएनएम बबिता प्रजापति ने पूछा कि कोरोना काल के दौरान आयोजित रूटीन टीकाकरण के दौरान जब लाभार्थी आते है तो वे डरे होते है कि कहीं टीकाकरण से उन्हे या बच्चे को कोरोना तो नहीं हो जाएगा, उनके मन से भ्रम कैसे दूर करें। एएनएम ने पूछा कि फैमली प्लानिंग को लेकर जब महिलाओं से बास्केट आॅफ च्वाइस की बात की जाती है तो वे ध्यान से सुनती है लेकिन बाद में निर्णय नहीं ले पाती, उन्हे कैसे मोटीवेट करेें। जिसपर यूपीटीएसयू की विशेषग्य ने एएनएम को बताया कि समुदाय को समझाएं की टीकाकरण कोविड 19 की सभी गाइडलाइन का पालन करते हुए किया जा रहा है जिससे कोरोना होने का खतरा ना के बराबर है और महिलाओं को परिवार नियोजन के महत्व को बताते हुए उन्हे समझाएं कि बास्केट आॅफ च्वाइस उनके लिए कितना जरूरी है। जिससे वे अपने होने वाले बच्चों के बेहतर भविष्य के सपने को भी आसानी से पूरा कर सकती हैं। कार्यशाला के अंत में डीआईओ डा. अरूण कुमार व डीएचईआईओ अरविंद मिश्रा ने सभी फ्रंटलाइन वर्कर को प्रशिक्षण के दौरान दी गई जानकारी को क्षेत्र में भ्रमण के दौरान अमल में लाने की सलाह दी। इस दौरान जिले के सभी एएनएम, आशा, आशा संगिनी, बीपीएम, बीसीपीएम व एचईओ मौजूद रहे।


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