"ग्रहण,,,,,,,

 



"मेरा जीवन,क्या यह जीवन


कैसी यह बेचैनी है


सांझ समझ ना सुबह समझ


कैसी यह सरगोशी है


"ग्रहण" का पहरा है जीवनब


ना कोई उन्माद है


ना कोई बासन्ती हवा है


ना कोई सम्वाद है


एक प्रहर की अंतिम बेला


यह कैसा संजोग है


इस जीवन की" ग्रहण"-कथा


ना अब कोई मेल है


जीवन है उन्मुक्त पवन -सा


"ग्रहण" न इसपे लगने देना


मिली जो साँसे जीवन की


खुश हो कर उसको जी लेना"""""


   *********


यह मेरी मौलिक रचना है,,,,,


©डॉ मधुबाला सिन्हा


   वाराणसी 


Popular posts
दि ग्राम टुडे न्यूज पोर्टल पर लाइव हैं अनिल कुमार दुबे "अंशु"
Image
भोजपुरी भाषा अउर साहित्य के मनीषि बिमलेन्दु पाण्डेय जी के जन्मदिन के बहुते बधाई अउर शुभकामना
Image
हँस कर विदा मुझे करना
Image
सफेद दूब-
Image
नारी शक्ति का हुआ सम्मान....भाजपा जिला अध्यक्ष
Image