छूकर मेरी ज़ुल्फ़ों को

 


छूकर मेरी ज़ुल्फ़ों को 


झोंका हवा का आया


कोई राग ग़ुनगुनाने 


मेरे चेहरे पर नूर छाया !


🌸🌸🌸🌸🌸🌸


कुछ पल चुरा के ख़ुशियाँ 


दामन में आज भर ली


होकर सवार तरणी 


मैं मौजों में आज मिल ली !


🌸🌸🌸🌸🌸🌸


छूकर मेरी ज़ुल्फ़ों को ...


झोंका हवा का आया


कोई राग गुनगुनाने


मेरे चेहरे पर नूर छाया ।


🌸🌸🌸🌸🌸🌸


जल ही जल है समाया 


मन उमड़ घुमड कर आया


लहरों की ये रवानी 


कहती है एक कहानी ।


🌸🌸🌸🌸🌸🌸


छूकर मेरी ज़ुल्फ़ों को ....


झोंका हवा का आया


कोई राग गुनगुनाने


मेरे चेहरे पर नूर छाया ।


🌸🌸🌸🌸🌸🌸


मैं उड़ चली हूँ नभ में 


हमसाया कौन आया


ना बाँधों ,बंधनों में 


विराग मुझको भाया !


🌸🌸🌸🌸🌸🌸


छूकर मेरी ज़ुल्फ़ों को ...


झोंका हवा का आया


कोई राग गुनगुनाने


मेरे चेहरे पर नूर छाया !


🌸🌸🌸🌸🌸🌸


ना रूठी मैं किसी से 


इल्ज़ाम क्यों लगाया


मन ने मन का साथी 


सजदे से उसके पाया ।


🌸🌸🌸🌸🌸🌸


छूकर मेरी ज़ुल्फ़ों को ....


झोंका हवा का आया


कोई राग गुनगुनाने


मेरे चेहरे पर नूर छाया !


 


✍🏻 संतोष कुमारी ‘ संप्रीति ‘


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