भविष्य के सइहारे में पिछला जीनिगी के अनुभव ही काम आवेला

शिक्षक दिवस पर विशेष



तारकेश्वर राय "तारक"


बिघना के दिहल इयाद राखे वाला एगो बड़ियार गुन के चलते ही आज अदमी अदमी बन पवलस । पिछला सीखल अर्जित कइल ज्ञान चाहे उ कवनो तरह के होखे, के बलबूते पर ही बर्तमान गुलजार बा भा ओकर कोशिश बा अउरी भविष्य के सइहारे में पिछला जीनिगी के अनुभव ही काम आवेला ।


 


 हमनीके सम्बन्ध ओह पीढ़ी से बा जहवाँ शिक्षक के स्थान सरवोपरि रहे । उ पीढ़ी जहाँ शिक्षा खातिर जरूरी रहे खाली इच्छा शक्ति के बिना कवनो दाम गणवेश के इसकुल जाए के छूट रहे । गदहिया गोल, बड़ी गोल, छोटी गोल नाँव के किलास रहे । गुरुजी के हाँथ से पिटाइल ठोकाइल हुंकाइल बिद्या प्राप्त कइला खातिर अनिवार्य मानल जात रहे । घरे बतवला पर ओह दण्ड में बढ़ोतरी के ही ढ़ेर अंदेशा रहे । एह शस्त्र के ढेर प्रयोग करे वाला गुरूजी लोग मरखहवा माटसाब क उपाधी से नवाजल जा । 


 


आजो कतना दिन के महीना ह ? पुछला पर मुठी बन्हा के उल्टा हो जाला बतावे खातिर । आजो बचवन के गणित हल करे के समय मन मे ई गूँज उठेला "का को का से काटिए, ता पीछे दो भाग, गुना करे धन जोड़ के, ऋण को दें घटाय ।" सार्क देशन के नाँव MBBS PAIN से इयाद राखल जात रहे | M= Maldives, B=Bangladesh, B=Bhutan, S= Sri Lanka, P=Pakistan, A=Afghanistan, I=India, N=Nepal. एह तरह के बहुते सूत्र मानस में आजो सुरक्षित बा । काम परते मुहँ से निकसी जाला । गुरूजी के देखते स्वतः सिर झुक जाला आ मुहँ से निकली जाला "पा लागी माटसाब" "गोड़ लागतानी ये ......"। 


 


केहु ठेठा के केहु आपन काम निकाले खातिर बुरबक बना के त केहु बिना लोभ के टाँग खिंचला के जगह बाँह ध के सीखे सिखावे में पूरहर सहयोग कइलस आ ज्ञान के आँखी खोले में मदद कइलस, एह आभासी पटल पर मौजूद ओह कुल्हिये गुरूजी लोग के शिक्षक दिवस के मोका पर बहुते पावलगी बा ।


 


✍तारकेश्वर राय "तारक"


गुरुग्राम, हरियाणा


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