भारत की क्रान्तिकारी मजदूर पार्टी के द्वारा फांसीवाद के बारे में जनता को जागरूक किया गया


ब्यूरो चीफ-सिद्धार्थ श्रीवास्तव अंबेडकरनगर।* 


आलापुर ( अम्बेडकर नगर) भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी इकाई की ओर से आज सिद्धनाथ गाँव में 'फासीवाद क्या है और इससे कैसे लड़े?' विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई गोष्ठी का संचालन मित्रसेन ने किया । गोष्ठी में फासीवाद के बारे मे विस्तार से चर्चा की गई और दुनियाभर में फ़ासीवादी उभार किस परिस्थितियों में हुआ, फासीवाद का इतिहास, फासीवाद की कार्यप्रणाली, भारत में फ़ासीवादी उभार की ज़मीन और राष्ट्रीय मुक्ति आन्दोलन से गद्दारी, 20वीं और 21वीं सदी के फ़ासीवादी उभार के बुनियादी अन्तर, और फ़ासीवाद से कैसे लड़ा जा सकता आदि विषयों पर मुख्य अतिथि प्रसेन ने विस्तार से बात रखी।प्रसेन ने कहा कि


फ़ासीवादी उभार की सम्भावना ऐसे पूँजीवादी देशों में हमेशा पैदा होगी जहाँ पूँजीवाद बुर्जुआ जनवादी क्रान्ति के ज़रिये नहीं आया, बल्कि किसी भी प्रकार की क्रमिक प्रक्रिया से आया । जहाँ क्रान्तिकारी भूमि-सुधार लागू नहीं हुए जहाँ पूँजीवाद का विकास किसी लम्बी, सुव्यवस्थित, गहरी पैठी प्रक्रिया के ज़रिये नहीं बल्कि असामान्य रूप से अव्यवस्थित, अराजक और द्रुत प्रक्रिया से हुआ जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों में पूँजीवाद इस तरह विकसित हुआ कि सामन्ती अवशेष किसी न किसी मात्रा में बचे रहे। ऐसे सभी देशों में पूँजीवाद का संकट बेहद जल्दी उथल-पुथल की स्थिति पैदा कर देता है। समाज में बेरोज़गारी, ग़रीबी, अनिश्चितता, असुरक्षा का पैदा होना और करोड़ों की संख्या में जनता का आर्थिक, सामाजिक और भौगोलिक तौर पर उजड़ना बहुत तेज़ी से होता है ऐसी स्थिति फ़ासीवादी उभार की जमीन तैयार करती हैं।


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