सफलताओं से खुश रहना सीखें 


सुषमा दीक्षित शुक्ला


सफलता पाने की इच्छा आप चाहे जिस उम्र में हों, दुनिया के कहीं भी रहते हों या आप के कैरियर का चाहे जो लक्ष्य हो ,लेकिन हर किसी के जीवन का लक्ष्य अपने जीवन में सफलता प्राप्त करना और खुश रहना होता है ।सफलता प्राप्त करने का मतलब सिर्फ पैसा कमाना और अपनी पहचान बनाना ही नहीं होता। इसका मतलब तो अपने जुनून का पीछा करना और एक मकसद के साथ जीना एवं अपने आज में खुश रहना होता है ।


यह है आपकी सोच और भावनात्मक स्तर से तय होगा कि आप छोटी-छोटी सफलताओं को उसे प्राप्त खुशियों को महसूस करें।


 इसके लिए आपको अपने अंदर से तमाम नकारात्मक विचारों को त्यागना होगा ।ताकि सफलता से मिली हुई खुशियां बर्बाद न हो सके।


  यह बात एक दूसरे की पूरक है कि जिंदगी में खुश रहने से मिलती है सफलता या सफलता प्राप्त करने से मिलती है खुशी। सफलता कोई परिणाम नहीं है जिसे हम प्राप्त कर सकते हैं यह तो महसूस की जा सकती है। लेकिन एक खुश और सफल जीवन जीने के लिए स्वयं के साथ अपने रिश्ते बेहतर करने होंगे, क्योंकि हमारी भावनात्मक और मानसिक स्थिति का प्रत्यक्ष प्रभाव हमारी खुशी और हमारी सफलता पर होता है ।


छोटी-छोटी सफलताओं में भी ख़ुशी छुपी हुई होती है बस उन्हें महसूस करने की जरूरत होती है। इसके लिए कुछ बातें जरूरी है जो अपनानी होंगी।


 आत्म नियंत्रण पर ध्यान देना चाहिए। अन्य लोग क्या कहते हैं, क्या करते हैं ,आजकल के समय में क्या चल रहा है ,आपने जैसा सोचा वैसा नहीं हुआ यह सब सोचना छोड़ दें ।आपने जो सफलता प्राप्त की ,जो पाया उस पर गर्व करें ,जो नहीं पाया उस पर अफसोस करना छोड़ दें। तभी आप सफलता का सुख उठा पाएंगे ।


दूसरी बात यह है कि तुलना को जिंदगी में जगह ना दे किसी भी तरीके से अपने काम में या परिणामों की दूसरों से तुलना करना खतरनाक है ।इस आदत की वजह से लोगों को देखने का हमारा नजरिया ऐसा हो जाता है कि हम उनको सिर्फ किए गए कार्यों ,परिवेश व परिणामों से पहचानने लगते हैं।


 प्रत्येक इंसान की खुद एक अनोखी रचना है ,इसलिए अपनी ख़ुशी और सफलता को किसी से तुलना करके खत्म ना करें ।


अपने अनुभवों से मित्रता कर ले जब तक हमारा ध्यान काम में ज्यादा काम के परिणाम यानी क्या खोया क्या पाया पर रहेगा तब तक हम अनुभव का महत्व नहीं समझेंगे ।


सफलता से खुश रहना है तो जीवन में खुशियों को अनुभवों से जोड़ें ।


सफलता से खुश होना है तो गंभीरता से परे होना जरूरी है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है लोग गंभीरता का मुखड़ा पहन लेते हैं ।जीवन में लक्ष्यों को लेकर गंभीर रहना चाहिए मगर काम मस्ती के साथ ही करने चाहिए।


 एक बात और है कि सफलताओं से खुशी महसूस करने के लिए हटकर सोचना भी जरूरी है। किसी भी व्यक्ति के प्रति कोई विशेष धारणा ना बनाएं वह आपको नकारात्मक बनाती है। उत्साह और उमंग बनाए रखें इसी उदासीनता नहीं आएगी ।


हमारी जिंदगी में नकारात्मक बातें हमारे उत्साह और जोश को ठंडा कर देती हैं ।


बच्चों जैसा नजरिया रखना चाहिए ।


जीवन में रोजाना कुछ उत्साहवर्धक कार्य करने चाहिए। हंसी मजाक बनाए रखनी चाहिए।


 खुद के अच्छे दोस्त बनना चाहिए।  


 तभी आप सफलता से प्राप्त खुशी को महसूस कर सकेंगे अन्यथा सफल होकर भी खुश नहीं हो पाएंगे ।


यह देखें कि हमारा रिश्ता खुद के साथ कैसा है ,अपने बारे में क्या सोच है ,,,,तो खुद के अच्छे दोस्त बनना जरूरी है सफलता से प्राप्त खुशियों को महसूस करने के लिए और उन खुशियों को सहेजने के लिए भी,,,,।


 


सुषमा दीक्षित शुक्ला


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