समाजवाद के नायक राम 


थे प्रथम जनक समाजवाद के 
है राम ने कहलाया 
सबरी का जूठा बेर खाकर 
सबको उसने दिखलाया। 


सुन धोबी की सत्य वाणी को 
सीता का परित्याग किया 
अनुशासन के चलते देखो 
वन में जा निवास किया। 


भरत जैसा भाई देखा 
माता पिता के पुत्र महान 
प्रजा की अगुवाई बनकर
सुख सुविधा किया बलिदान। 


गीध जटायु लड़ा रावण से 
अपना प्राण गँवाया है 
खुफिया बनकर श्री राम का 
सीता का मार्ग बताया है। 


पढ़ने और पढ़ाने वाले 
न समझा न समझाया 
जाति पाति का झूठा बंधन 
लेकर सबको भरमाया। 


लोभ नहीं था राजगद्दी का 
थे सर्वज्ञ परोपकारी 
बात मान कर भक्त निषाद का 
बहुरी नाव में पग धारी।


अग्नि परीक्षा लिया सिता का 
अपना फर्ज निभाया है 
राजतंत्र था राम राज्य में 
पर, लोकतंत्र कहलाया है। 


देखा अनेक राजा राज्य
पर, बापू जी हमारे सरताज
भारत भी वैसा बनेगा 
जैसा बना राम का राज। 


है भारत का राम जहाँ 
हमरा वहाँ की थाती है 
मोह जहाँ न राज गद्दी का 
वही तो भारत वासी है। 


माँझी नाम महान राम का
भव सागर को पार करे 
हरे पापियों के पाप और 
दुखियों के दुखड़ा दूर करे। 


बिक्रमा माँझी 
सिहोडीह 
गिरिडीह (झारखंड)मो0न0 9155856655
स्वरचित


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