मृत्यु से


बड़ी दबंग हो 
कोई नियम नहीं मानती 
जहां हो पहुंच जाती हो
सीमाएं नहीं जानती
इस देश उस देश
इस गांव उस गांव
रोकती तुम्हें ना दुख की
धूप न सुख की छांव
ना देखती हो दिन रात
न छोटा बड़ा पहचानती हो
पहुंच जाती हो सबके पास 
सबसे जबरन संबंध ठानती हो 
मृत्यु 
मृत्यु तुम साथ ही जन्मती हो 
जीवन भर साथ ही चलती हो 
आखिर छुड़वा कर दुनिया सारी 
प्राणों के साथ ही निकलती हो 
नींद आ जाए अगरचे मुझे
पर तुम कभी नहीं सोती 
मृत्यु तुम सच्ची महबूबा हो 
कभी बेवफा नहीं होती


स्वरचित


 सुनीता द्विवेदी 
कानपुर उत्तरप्रदेश


Popular posts
भोजपुरी भाषा अउर साहित्य के मनीषि बिमलेन्दु पाण्डेय जी के जन्मदिन के बहुते बधाई अउर शुभकामना
Image
सफेद दूब-
Image
परिणय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
Image
दि ग्राम टुडे न्यूज पोर्टल पर लाइव हैं अनिल कुमार दुबे "अंशु"
Image
अभिनय की दुनिया का एक संघर्षशील अभिनेता की कहानी "
Image