कोरोना को लेकर लोगो को जागरूक करना अभी भी जरूरी - डॉ ठाकुर

 


• कोरोना योद्धाओं मे एक चिकित्सक कोरोना को मात देकर मरीज़ों की कर रहे हैं सेवा
• आइसोलेशन वार्ड में मरीज़ों के उपचार के दौरान खुद भी हो गए थे संक्रमित
• सैकड़ो किलोमीटर घर से दूर  डीएमसीएच में दे रहे अपनी सेवा


मीर शहनवाज


दरभंगा। कोरोना की रोकथाम के लिए विश्व स्तर पर प्रयास जारी है. साथ ही संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए कोरोना योद्धा अपने जीवन को दांव पर लगाकर मरीजों की सेवा कर रहे हैं. संक्रमितों के उपचार के क्रम में कई चिकित्सक खुद भी संक्रमित हो गये लेकिन कई मरीजों की जान बचाई है. इसी कड़ी में दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के करीब 5 चिकित्सक कोरोना वायरस के चपेट में प्राप्त जानकारी के अनुसार आ चुके हैं वहीं इनमें से कुछ चिकित्सक अब बिल्कुल स्वस्थ हैं. अब वे दोबारा अपने कर्तव्य पथ पर चलकर मरीज़ों की सेवा कर रहे हैं. दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के शिशु विभाग में कार्यरत डॉ एमएन ठाकुर एक ऐसे ही कोरोना योद्धा है, जो पिछले माह 30 मई को खुद कोरोना के शिकार हो गए थे. रिपोर्ट पॉज़िटिव आने के बाद 14 दिन के लिए उन्हें आइसोलेट कर दिया गया. काम का जज़्बा कुछ ऐसा था कि जिस दिन वो ठीक हुए उसी रात को दुबारा आकर फिर से ड्यूटी जॉइन कर लिया. इस समय सामान्य रूप से कोरोना योद्धा डॉ ठाकुर कोरोना को मात देकर पूर्व की भांति शिशु विभाग में मरीजों की सेवा में लग गए हैं.


मानवीय सेवा मनुष्य का पहला धर्म - डीएमसीएच के आइसोलेशन विभाग में कार्यरत डॉ ठाकुर जब कोरोना से संक्रमित हो गए थे तब यह बात उन्होंने घर पर भी नहीं किसी को कहा. डॉ ठाकुर ने बताया चिकित्सक का पहला धर्म मानवीय सेवा होता है. संक्रमण के इस दौर में चिकित्सक अपनी जान की परवाह किए बगैर संदिग्ध व संक्रमित मरीजों की चिकित्सा में दिन रात लगे रहते हैं. यही सच्ची पूजा है. उन्होंने बताया ठीक होने के बाद उन्होंने तुरंत ड्यूटी ज्वाइन कर ली थी. कोरोना के इस दौर में लोगों को उनकी अधिक जरूरत है. कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण लोगों के मन में डर तो जरुर बढ़ा है. इसलिए इस मुश्किल दौर में सभी को सहयोग करने के लिए आगे बढ़ना चाहिए. 


▪ संक्रमण के दौरान डीएम और शिक्षकों ने रखा इनका पूरा ख्याल -
डॉ. ठाकुर ने बताया वह पहले से हाइपरटेंशन से  ग्रसित हैं.  लेकिन जब कोरोना से वह संक्रमित हुए तो थोड़ा उन्हें डर भी लगा. लेकिन वह धीरे-धीरे सामान्य हो गए. उन्होंने बताया इस बीच कोरेंटिन में रहने के दौरान डीएम डॉ त्यागराजन एसएम खुद उनका हाल चाल पूछने भी लगातार आते थे. साथ ही विभागाध्यक्ष डॉ के एन मिश्रा, यूनिट हेड डॉ अशोक कुमार, डॉ मणिशंकर आदि चिकित्सको ने अभिभावक की भांति पूरा ख्याल रखा. डॉ ठाकुर ने बताया घर से दूर विपरीत परिस्थिति में भी उनके शिक्षक उनके साथ थे. कुछ चिकित्सक कोरेन्टीन में घर से खाना बनाकर उनको भेजते थे.  


कोरोना से डरे नहीं बल्कि करें मुकाबला: 


कोरोना वायरस पर विजय प्राप्त कर चिकित्सक डॉ एमएन ठाकुर पुनः शिशु विभाग में अपने काम को बखूबी अंजाम दे रहे हैं. डॉ ठाकुर बताते हैं कोरोना वायरस एक खतरनाक बीमारी है. इससे बचने के लिए लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग एवं अन्य सुरक्षात्मक उपाय अपनाने चाहिए इससे संक्रमण से दूर रहा जा सकता है. मरीज़ व परिजनों को कोरोना से भय मुक्त करते हुए वह बताते है कोरोना से मरीज की मृत्यु दर का आंकड़ा बहुत कम है. लेकिन थोड़ी सी सावधानी बरतने पर कोरोना पर पूर्ण रूप से विजय प्राप्त किया जा सकता है. डॉ ठाकुर का यह भी मानना है कि अभी भी बहुत सारे लोग कोरोना के प्रति सजग नहीं हुए हैं. अभी भी कोरोना को लेकर लोगों को जागरूक करना चाहिए बहुत लोग अभी भी कोरोना से बचाव के लिए मास्क एवं सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन नहीं कर रहे हैं साथ ही साफ-सफाई का भी ध्यान नहीं रख रहे हैं लोगों को इसके लिए सचेत करना भी अब जरूरी है.


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