कजरिया


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मन हल चल मचावे उमिरिया।
तोरि आँखि में लागल कजरिया।


निंद आवे ना रात भर जगावे,
कारि कजरारि आँखि कजरिया।।


मन करें देखि,हरदम निरेखीं,
बड़ी मतवारि तोरि सुरतिया।।


मन भावे जवन मूर्ति बनाइ,
राँखि प्रेमनगर हिया जियरिया।।


प्यार पनकि धरे लागि मोजर,
मन मचले,हहरे ला छतिया।।


ए राह में ना प्रीत गीत मिली,
खालि दुनियां दुखवा दरदिया।।


         ©️®️
  गणपति सिंह गीत
     छपरा, बिहार


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