जगत व्यापी कोरोना


जगत का प्रत्येक कोना कोरोना महामारी से व्यथित है। दावानल का दर्जा भी इसके लिए कम है। इसका कोई अंत नहीं दिखाई देता, दिखता है तो बस चारों ओर फैला इसका भयंकर तांडव।
इसने परिचित-परिचित को एक दूसरे से दूर भगा दिया। एक चेहरा दूसरे चेहरे को देख कर नज़दीकियों की बजाए दूरियां बनाने में मशगूल है।
इसने मंदिर मस्जिद गिरजाघर के दरवाजों को अपने हाथ ले लिया। इनमें स्थापित मूर्तियों में समाहित भगवान को भी इसने गहरी नींद सुला दिया। कभी-कभी सुनता था कि भगवान के चमत्कार से मंदिर के किवाड़ स्वत: ही खुल गए। और सुनता था उस मंदिर के भगवान ने वहां फला-फला चमत्कार दिखाया। लेकिन कोरोना काल में ऐसा एक भी चमत्कार ना सुना । संभावना व्यक्त कर सकता हूं, हो सकता है पुजारियों ने भगवान को नींद की दवाई दी हो। ताकि कोई चमत्कार कोरोना का शिकार ना हो जाए।
   इतना कहना चाहूंगा जो अंधभक्त है वो दीपक, थाली, ताली में मशगूल है और जो देशभक्त है वो विज्ञान में मशगूल है।
सफलता मिलेगी जरूर,
         किसी मंदिर, मस्जिद, गिरजा या पुजारी को नहीं, बल्कि सफलता मिलेगी उस विज्ञान को, उस वैज्ञानिक को, उस डॉक्टर को, और हर संघर्षशील इंसान को।
अंत में इतना कहना चाहूंगा।
मत लडना अब मंदिर मस्जिद गिरजे के लिए, लड़ना तो सिर्फ मानवता के लिए।
लड़ना तो सिर्फ मानवता के लिए ।
(स्वरचित रचना)
    ✍️ रमेश धोरावत
कारोला, सांचोर,
जालोर, राजस्थान। 


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