गैंगस्टर के खिलाफ इनकाउंटर नही है कारगर उपाय 


सुषमा दिक्षित शुक्ला


किसी भी दुर्दांत अपराधी का एनकाउंटर पुलिस द्वारा पहले से सुनियोजित प्रक्रिया के तहत नहीं होता, ना ही यह कारगर उपाय है अपराध मुक्त समाज का ।
सजा देने का अधि कार तो न्याय प्रणाली को ही होना चाहिए ।
मगर जब अचानक ऐसे हालात बन जाते हैं  कि पुलिस और अपराधी के बीच टकराव होता है, अपराधी उसकी अभिरक्षा से भागने की कोशिश करता है या उसके ऊपर आक्रमण करता है तो पुलिस का यह नैतिक दायित्व बन जाता है कि वह सेल्फ डिफेंस के तहत उसका एनकाउंटर कर सकता है ।
लेकिन अगर यह फेक इनकाउंटर है  तो कतई अन्याय है  गलत है, क्योंकि सघन जांच-पड़ताल के बाद साक्ष्यों के आधार पर दंड देना का अधिकार  केवल न्याय प्रणाली को  ही है ना कि पुलिस को ।
मगर सेल्फ डिफेंस के तहत पुलिस  अपराधी का एनकाउंटर कर सकती है ।
हालांकि इन काउंटर में अपराधी की मृत्यु हो जाने से अपराध से जुड़े की रहस्य भी मर जाते है ।
अपराधी की पूरी दलील सुने बिना, पूरी जांच-पड़ताल के बिना उसके साथ अपराध में संलिप्त अन्य कई अपराधी दंड पाने से बच जाते हैं और इस तरह अपराध की चेन नही टूट पाती ।
हाँ यदि वास्तव मे ऐसे  हालात पुलिस के सामने  बनते हैं की सेल्फ डिफेंस  के लिए  पुलिस  अपराधी को शूट कर सकती है और करना भी चाहिए ।
 पुलिस क्या हर किसी को सेल्फ डिफेंस में दोषी को शूट करने का अधिकार है ।
लेकिन फेक इनकाउंटर तो समाज के प्रति अत्याचार है ऐसे मे कई अपराधी दण्ड पाने से बच  जाते हैं।


सुषमा दिक्षित शुक्ला


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