आज नहीं निकलेगा चंदा सारी रात


आज नहीं निकलेगा चंदा सारी रात,
मेरे संग जगा है चंदा सारी रात,
मेरी पथरीली,अंधियारी राहों को
रौशन करता, मार्ग दिखाता,
मेरे संग चला है चंदा सारी रात,
थककर चुर हुआ है चंदा सारी रात,
नहीं चाहिये मुझको और किसी का साथ,
जब मेरा पूनम का चँदा है मेरे साथ।।


आज नहीं निकलेगा चंदा सारी रात,
मेरे संग जगा है चंदा सारी रात।।


नींद नहीं आती जब मुझको ,
मीठी सी लोरी गा गा कर,
हल्की सी थपकी दे दे कर ,
 मुझको रहा सुलाता चंदा सारी रात,
तकिया मेरी बना है चंदा सारी रात,
नहीं चाहिये मुझको और किसी का साथ,
जब मेरा पूनम का चँदा है मेरे साथ।।


आज नहीं निकलेगा चंदा सारी रात,
मेरे संग जगा है चंदा सारी रात।।


छिपकर बादल के बिस्तर में,
जी भर उसको सो लेने दो,
आज सितारों की चादर को,
 मेरे लिए बुना है चंदा सारी रात,
नहीं चाहिये मुझको और किसी का साथ,
जब मेरा पूनम का चँदा है मेरे साथ।।


आज नहीं निकलेगा चंदा सारी रात
  मेरे संग जगा है चंदा सारी रात।।


नीलम द्विवेदी
रायपुर छत्तीसगढ़


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