नवको


"पांच गज के साड़ी में
गज भर के ओहार बा
आ गइलीं नवको,देखीं
कइसन उनकर सिंगार बा

हथवा में मेहंदी छोपाईल
गोड़वा लाल महावर बा
लाली चुनरिया पांचे गज के
पियर भराईल  सेनुरा बा

ओढली ओहिपर गोटा चुनरी
काजर आंख अंजाईल बा
गवे-गवे अब गोड धराइल
दउरो त आगा-पाछा बा

गारी पारे गाँव के मेहरिया
भइया-माई-बाबू के
उ रिसीए में धम्म बइठली
सासु के गोड़तारी में

हाय, हैलो के बोल सुनवली
ननदि के लिहली अँकवारी में
ससुरा के गुडमार्निंग बोलली
आ,देवरा के चुमली गाली में

आजा पिया सेज सजल बा
गुड़ नाईट हो जाएके
आ भोरे के फेर भोरे देखेम
स्वीट साईट हो जाएके

चार अक्षर अंग्रेजी पढली
हिन्दी के देहली भुलाएके
भोजपुरी के गोड़तारी मरली
पंजरा अब नाहिं सटावे के,,,,,,,
        ★★★★★
© डॉ मधुबाला सिन्हा
वाराणसी


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