समय


जो बीत जाय
नहीं वह आता है दुबारा
पल-पल चुनकर
पँख-पंखेरू
चलते हैं फिर चौबारा
जी लो जो मिला तुम्हें है
न बन जिओ बेचारा
जीवन के अनमोल हैं पल
जब तक साँस
चले ,फिर चले
वक्त न मिलता दुबारा
रोने से तो न आएगा
लौट के फिर
यह तो कभी
हँस हँस पल पल जी लो
जी जीवन है
उसको तू अभी,,,
विश्वास,,,
जीवन की पूंजी है
कभी न खोना इसको तुम
पल पल यह तो
साथ है तेरे
बिन इसके अधूरे तुम
करते हो तो कर लो
पर जीवन का अंग
न बनने देना
जिस दिन छलना हो जाए
फिर यह नहीं जीने देगा
घुट घुट कर जीने से बेहतर
विश्वास पर विश्वास करो
ना कर पाए,मत करना
करो तो न कभी
अविश्वास करो
जो हो रहा उसे 
होने दो
न तुम बदलोगे
न समय बदलेगा
तड़पोगे तुम हीं खुद
न वक्त बदलेगा
न पल बदलेगा,,,
प्रतिष्ठा,,,
अपने हाथों 
खुद की है
खुद ही इसे सजाना है
खुद से खुद के
लिए है जीना
न कभी इसे गवाना है
अपने हाथों की रेखाएँ
खुद से हीं मजबूत करों
जिस पल चली गयी यह तो
जी न पाओगे
फिर इस बिन,,
फिर कहती हूँ
सोंच लो तुम
समय,विश्वास और प्रतिष्ठा
यह जीवन की पूंजी ह
गुज़र गया जो वक्त
सही से
बस---
वही जीवन की पूँजी है,,,,,,,,,
      *******
डॉ मधुबाला सिन्हा


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