साहित्य अर्पण एक पहल द्वारा संपन्न हुई खिड़कियाँ कथा कहानी गोष्ठी

 



संवाददाता कुमार संदीप


साहित्य अर्पण एक पहल के द्वारा बेहतरीन आयोजन हुआ जिसे खिड़कियाँ नाम दिया गया। जिसे 4 भागों में विभाजित किया गया। जिनके नाम है झरोखा, गवाक्ष, वातायन, दरीचा, सभी बैठक शाम 4 बजे ज़ूम द्वारा सम्पन्न की गई। दरीचा को टीना सुमन जी और नीतिनि उपाध्ये जी ने संचालन किया। जहाँ टीना जी ने सभी रचनाओं की समीक्षा की वही नीतिनि उपाध्येजी ने सभी रचनाकारों का परिचय कराया। इसमें चार प्रतिभागी  पवनेश ठाकुराठी, डॉ अंजू लता,दीपाली पंत, आरती श्रीवास्तव ने प्रतिभगिता की जिनके नाम निम्न है
उनके द्वारा वह बेचारी लड़की, जीने का तरीका, छिद्रानिवेषी, अमोल कथा कहानियाँ सुनाई गई। यह गोष्ठी दिनाँक 9-05-2020 को सम्पन्न हुई।


 वही दूसरी गोष्ठी दिन शनिवार शाम 4 बजे झरोखा टीम द्वारा दिनाँक को की गई। इसका संचालन ज्योतसना जी ने रचनाकारों का परिचय देते हुए किया भावना सागर बत्रा जी ने सभी की समीक्षा करते हुए रचना पर विचार प्रस्तुत किये। गोष्ठी में पं.गौरव शुक्ला शुक्ल, अनिता तोमर, डॉ वर्षा कोस्टा, अनिल मकरिया, वंदना भटनागर आदि रचनाकारों ने मानसून, रंगहीन, माँ कहीं नही गयी, डब्बा ज़िंदगी, क्या खोया क्या पाया रचनाओं का पाठ किया।


खिड़कियाँ गोष्ठी का तीसरा पड़ाव दिनाँक 23 मई 2020 को समय 4 बजे सम्पन्न हुआ। इसमें अनूपा हरबोला जी, शोभा शर्मा, गोकुल क्षत्रिय, आशु गौड़ आदि रचनाकारों ने भाग लिया एवम उनके द्वारा बन्द दरवाजा, लोटा, पर्दाफाश, बेटियाँ, मोहब्बत आदि रचना पढ़ी गयी। कार्यक्रम के सूत्र धार विनय गौतम जी ने सभी रचनाकारों का परिचय कराया एवम कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। अंकिता भार्गव जी द्वारा सभी रचनाओं की समीक्षा की गयी।


कार्यक्रम का अंतिम पड़ाव दिनाँक 31-5-2020 को पूर्ण हुआ जिसका संचालन नेहा शर्मा एवम एम के कागदाना द्वारा किया गया। जिसमें रचनाओं की समीक्षा एम के कागदाना जी द्वारा की गई। कार्यक्रम में आदरणीया पुनम बागड़िया जी द्वारा उन्मुक्तता रचना, शिवानी गौर जी द्वारा जीवन अभी बाकी है। एवम निधि घरती भंडारी जी द्वारा अधूरा वजूद कहानी का पाठ किया गया। 


इस तरह यह चरण चार भागों में बेहतरीन रचनाकारों की कहानी कह गया एवम उनके किरदारों को इस कठिन समय में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए स्वछंद भाव से जीना सीखा गया। साहित्य अर्पण की यह छोटी सी कोशिश थी नवोदितों के साथ मिलकर कोरोना के खिलाफ एक जंग लड़ने की जिसके लिए सभी ने भरपूर सहयोग दिया एवम ऑनलाइन अपने अपने घरों में रहकर बेहतरीन रचनाओं का पाठ किया साहित्य अर्पण आपके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है।


 


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