मधुर वचन....


कोई टेक्स नही लगता है, मधुर वचन बोलनें में,
लेकिन मन जरूर खुश होता है, मधुर वचन सुन करके!
कोई लाभ नही मिलता है, कटु वचन बोल कर,
लेकिन हृदय ज़रूर आहत होता है, कटु वचन सुन करके!
मधुर वचन औषधि के समान होते हैं!
हमारे बोल हमारी परवरिश़ को दर्शाते हैं
हमारे मीठे स्नेहमयी बोल सदैव पर्वत से शान्त हों
आसमान से विराट हों, कलियों से मुस्कुराते हों, 
भँवरों से गुनगुनाते हों, हृदय को सुख पहुँचाने वाले हो!
लेकिन हम कभी भी ऐसे कटु वचन न बोलें!
जो वज्र से कठोर हों, तीर से नुकीले हों, सर्प से विषैले हों, 
मिर्च से तीखे हों, आग में घी का काम करते हों। 
मन को आघात पहुँचाने वाले हों!
हमारे बोल ही तो हैं, जो अज़नबी को अपना और
अपने को अज़नबी बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
हम अपने बोल-वाणी से ही मान व अपमान पाते हैं!
हम जग में रहें या न रहें, हमारे मीठे बोल सदैव रहते हैं
जीवन में सच्चा अगर सुख अनुभव करना है...
तो पहले तोलो, फिर बोलो, सदैव मीठे बोल ही बोलो!


नाम- मंजू श्रीवास्तव
पता- कानपुर (उत्तर प्रदेश)


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