लघुकथा

सौदा -बेटी का शव



 डॉ निरुपमा वर्मा 
जैसे ही खबर आई। कि उनकी बेटी की मृत्यु हो गई। घर में सन्नाटा छा गया। मां माथे पर हथेली मार कर बोली -हाय!!और धप्प से चारपाई पर गिर पड़ी। चार साल पहले ही तो धूमधाम से बेटी का विवाह किया था। कितनी उमंग थी उसे ससुराल जाने की । गांव की बेटी शहर जा रही थी ब्याह करके, - खुशी तो होनी थी । और आज ससुराल से उसकी मौत की खबर आ गई !! बाप राम खिलावन को भी मानो किसी ने धक्का दे कर जमीं पर गिरा दिया हो । खुद को संभाला और बेटे के साथ रामखिलावन बिटिया के ससुराल पहुंचा। भीड़ जमा थी। वहां बेटी का शव रखा था। कानाफूसी हो रही थी - गला दबा के मारा है / हूँ लगे तो यही है । फिर भीड़ में किसी ने सलाह दी - थाने जा कर रिपोर्ट लिखवा दो । लड़की के भाई ने भी कहा --रिपोर्ट लिखवा दो , बापू !! सजा तो मिलनी चाहिए इन हत्यारों को। लेकिन रामखिलावन पर तो जैसे बर्फ की परत जमी थी। हथेलियों के बीच सर थाम के बैठा था।क्या करे वह ? एक मुकदमा तो वह पिछले कई बरस से लड़ रहा है । उसके छोटे से मकान से लगी खाली जमीन जो उन्ही की थी , दबंगो ने दबा ली थी । उसका मुकदमा लड़ते लड़ते उसका  बाप मर गया ।  वह खुद जवान से अब बूढ़ा हो चला किन्तु जमीन का वह टुकड़ा उसे आज तक वापस नहीं मिला । वह अब भी हर तारीख पर कोर्ट जाता  है। 
अचानक रामखिलावन का खून मानो बर्फ की सिल्ली बनने लगा । 
 रामखिलावन के लड़के ने कहा --बापू ! मैं जा रहा हूँ थाने रिपोर्ट लिखवाने । --सुनते ही रामखिलावन चिल्लाया --" बईठ ! इहाँ !!  --कोई रिपोर्ट नही लिखवानी मुझे !! 
सुन कर बेटा के साथ गांव के लोग भी हैरत से राम खिलावन को  देखने लगे । 
-दबी आवाज में  रामखिलावन ने कहा --"इस बेटी की शादी में तीन लाख रुपये में अपने खेत गिरवी रखे थे मैंने । अब तक सूद ही नहीं चूकता कर पाया । '  कह कर वह कुछ देर के लिए खामोश हो गया। बूढ़ी छाती में उठते दर्द की खांसी का बलगम रोक कर हांफते हुए अपने समधी की ओर देखते हुए बोला - सब मिला कर पांच -छः लाख में समझौता करने को तैयार हूं मैं । " 
- क्या कह रहे हैं पिता जी ??? बेटे ने बाप को हिक़ारत  से देखते हुए पूछा ।
रामखिलावन की बेबसी आंखों में उतर आई । रोते बिलखते हुए कहने लगा -  " गिरवी रखा खेत छुड़ा लूंगा मैं !! " 
दूसरी बेटी का ब्याह भी तो करना है।


 --  डॉ निरुपमा वर्मा 
 एटा -उत्तर प्रदेश


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