किसी वरदान से कम नहीं है पारगामा ग्राम का प्राकृतिक चुँआ

जेमन द्रौपदीर साड़ी...तेमनी आछे एकटि डाड़ी...


ईचागढ़/चांडिल:कुकड़ु प्रखण्ड के पारगामा गाँव में स्थित एक प्राकृतिक जल स्त्रोत (चुँआ या डाड़ी) इस भीषण गर्मी में वरदान साबित हो रही है.जहाँ चारों तरफ पानी की हाहाकार मची हुई है,कुँए और तालाब सुख रहे हैं,चापाकल से भी पानी नहीं निकल रहा है,ऐसे स्थिति में पारगामा का यह चुँआ लगातार अपने शीतल और मीठे पानी से सबके दिलों को ठंडक पहँचा रही है.
झुमुर कवि गुरुचरण महतो के झुमुर गीत "आमार ग्राम" में उसने इस संबंध में लिखा है कि *जेमन द्रौपदीर साड़ी,तेमनी आछे एकटि डाड़ी* अर्थात् गाँव के पश्चिम में स्थित यह डाड़ी या चुँआ ठीक उसी तरह अनवरत बह रही है जिस तरह महाभारत काल में द्रौपदी की चीर-हरण के समय उसका साड़ी खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था.
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार श्री महतो ने बताया कि इस जल स्त्रोत का संबंध त्रेता युग से है.जब श्रीराम,सीता और लक्ष्मण वनवास के दौरान तीन दिनों के लिए पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिला अंतर्गत अयोध्या पहाड़ में रुके थे तब राम बुगी-बुगी नामक एक चुँआ में नहाया था और उसी चुँआ का संतिया गर्त पारगामा में उदय हुआ.आज भी सेंदरा के दिन यहाँ से फुल,सिंदुर और कीचड़ पानी निकलता है.गाँव के ही श्री छुटु महतो ने जानकारी देते हुए बताया कि इसका पानी बहुत पतला(कम घनत्व)होने के कारण ईचागढ़ का राजा भी इस पानी को पीने के लिए विशेष रुप से मंगाता था और आखिरी बार राजा ने ही इसका मरम्मत करवाया था.पानी का बहाव कम होने के कारण तत्कालीन विधायक श्री अरविंद कुमार सिंह ने 2005 में पुराने वाली चुंआं से 12-15 फीट की दूरी में दूसरा नया चुंआ खुदवाया और चबूतरा भी बनवा दिया था।
श्री पितम महतो ने जानकारी देते हुए कहा कि इसके पानी से पारगामा, कुसुमटाँड़,चुनचुड़िया और काड़रगामा के लोग लाभान्वित हैं.
ग्रामीणों ने क्या कहा
 (१)यह चुँआ पारगामा गाँव की पहचान है.इसी के कारण बहुत से बाहरी लोग पारगामा के बारे में जानते है,इसका संरक्षण होना चाहिए-(हरमोहन महतो)
(२)पीने के साथ-साथ सभी घरेलु कामों और खेतों में इस पानी का प्रयोग होता है-(जसुमती महतो)
(३)ऐतिहासिक धार्मिक स्थल होने के कारण यह हमारे लिए गर्व की बात है-(आशुतोष महतो)
(४)इस प्राकृतिक अनमोल धरोहर को बचाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है-(कमलेश यादव, प्रधानाध्यापक)


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