देखते ही देखते नजारा "बदल गया".!!


चले थे साथ मंजिल पाने के लिए,
कुछ दूर चले कि रास्ता "बदल गया".!!


बदलना तो नियम है प्रकृति का,
क्या हुआ जो इरादा "बदल गया".!!


वक्त बदल जाता है, शक्ल बदल जाती है,
 तो क्या जो इंसान का ईमान"बदल गया".!!


हमनें देखा है तकदीरों को बदलते हुए,
देखते ही देखते नजारा "बदल गया".!!


ठिकाना बदलने की बात क्या करना,
पलक झपकते ही फसाना "बदल गया".!!


यार से यारी भी करना अब देख भाल के,
मूड बदलते ही अब यराना "बदल गया".!!


आश्वासन देंगे हरपल तुम्हें जिताने का,
अवसर आने पर निशाना "बदल गया".!!


बदलने की बात मत करो ऐ"भावुक",
हरपल बदलती शय का,पैमाना"बदल गया".!!


 बदल न सका तो सूरज-चांद धरती-आसमान,
वरना पूरा वातावरण और शमा "बदल गया'.!!


स्वरचित


अर्चना भूषण त्रिपाठी"भावुक"


मुम्बई....


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