मुस्कुराना अच्छा लगा

 



कभी जब सोचा तेरे बारे में बताना अच्छा लगा।
बात कुछ भी न थी पर यूं मुस्कुराना अच्छा लगा।


कह देते जो तुम दिल की बात फिर क्या गम था;
तेरा राज़ दिल में छुपा प्यार निभाना अच्छा लगा।


हो गई मुद्दते अब क्या कसक दिल में कोई होगी;
बीती यादों का जो तुम लाए नज़राना अच्छा लगा।


इस दिल में जगह न किसी के लिए है कहीं बाकी;
हो गया था इश्क हमें वो गुज़रा ज़माना अच्छा लगा।


हर प्यार की मंज़िल नहीं होती है ये हमें भी खबर;
 दौरे आज़माईश का वो मोसम सुहाना अच्छा लगा।


कामनी गुप्ता*
जम्मू !


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