लॉक डाउन के चलते उत्पन्न हुई नकारात्मक प्रभावों को लेकर कवि गुरुचरण महतो ने लिखा "दुनिया के दो रूप", व्हाट्सएप-फेसबुक में लोग कर रहे हैं पसंद और शेयर

 



जमशेदपुर:शहर के बारीडीह निवासी युवा कवि गुरुचरण महतो ने लॉक डाउन के चलते उत्पन्न हुई  नकारात्मक प्रभावों को लेकर "दुनिया के दो रूप" शीर्षक से एक कविता लिखा है।कविता के माध्यम से उसने बताया है कि इस अजीबोगरीब दुनिया के दो आधे अधूरे रूप हैं। एक्सरा चकाचौंध से भरी है तो दूसरी तरफ अंधेरा ही अंधेरा है।वैशाख जेठ की तपती दोपहरी में कंधे और सिर पर पूरे परिवार की बोझ लादे हमारे देश के मजदूर नंगे पैर,भूखे-प्यासे ही अपने अपने गांव की तरफ निकल पड़े हैं। इन लोगों के पास ना जाने का साधन है और ना ही जेब में पैसा।वहीं देश के कुछ सक्षम और अमीर तथा तथाकथित समाजसेवी लोग अपना जमीर बेच कर ठंडे,सुगंधित वातानुकूलित घरों में ऐश की जिंदगी गुजार रहे हैं।ना जाने यह गरीब आखिर किस जन्म की पाप का सजा भुगत रहे हैं।उधर पढ़े-लिखे नेता-अधिकारी सत्ता के नशे में इन लोगों को खूब ऑनलाइन ज्ञान पेलकर और भटका रहे हैं।अपने ही देश में पलायन को मजबूर गरीब और दिहाड़ी मजदूरों के अंतहीन दर्द के मंजर को एहसास करते हुए कवि गुरुचरण महतो ने गुस्से में आगे लिखा है कि ऐसे वक्त में भी जिनकी आत्मा कुंठित नहीं हुई है उन्हें इन लोगों की हाय लगे।इस कविता को उसने फेसबुक में भी अपलोड किया है तथा व्हाटसेप के विभिन्न ग्रुपों में भी जमकर शेयर और पसंद किया जा रहा है।


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