कुछ भूला कुछ याद रहा

एक बिसाती एक पिटारा
एक ठिकाना गली चौबारा


उसके एक पिटारे में जी
हैं कितनों के सिंगार छुपे
बिछुवे पायल चूड़ी कंगन
लख नौ - नौ के हार छुपे


काकी आओ तुम भी लेलो
चाची आओ तुम भी ले लो
ले लो बिटिया भोली भाली
बहूरानी जी तुम भी ले लो


आना दो आना कम देना
अब ना हों तो  कल देना
या दे देना कुछ चना चबेना
जब दाम जँचें तुम तब देना 


सिंदुरा ले गईं सौभाग्यवती
पायल पा ली भौऊजाई ने
चूड़ी कंगन मुनियां ले गयी
सजना किये दूर कमाई ने


चलता हूँ कल फिर आऊंगा
कुछ नया नया दिखलाऊँगा
अफसोस न कर ना याद रहा
जो कुछ भूला कुछ याद रहा


मनोरमा सिंह


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