कोरोना कहर का रियल एस्टेट सेक्टर की डिमांड पर अत्यधिक  नकारात्मक असर

 



सुषमा दीक्षित शुक्ला


 कोरोना वायरस कहर से  रियल स्टेट क्षेत्र भविष्य को लेकर काफी निराश है। रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स के अनुसार रेजिडेंशियल रियल इस्टेट में इस साल डिमांड घटने की आशंका है ,लेकिन यह भी सच है कि आगे कोरोना से निकलने के बाद आने वाले समय में रेडी टू मूव इन होम्स की डिमांड बढ़ेगी ।लोग रेंटल इनकम के लिए रियल एस्टेट में निवेश करेंगे ।लोग अपना खुद का घर शहर के बाहर लेना पसंद करेंगे जो कन्जेस्टेड एरिया से दूर हो।
 डेवलपर्स को अब स्मार्टहोम बनाने होंगे जहां से लोग अपने घर से लैपटॉप के जरिए काम कर सके ।घरों में एक ऐसा ओफिस नुमा कमरा  बनाना होगा जहाँ से लैपटॉप के जरिये घर से ही काम किया जा सके ।
 कोविड-19 के बाद 20 फ़ीसदी प्रॉपर्टी के भाव  गिर सकते है ।होम लोन देने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कारपोरेशन उर्फ एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख के अनुसार कोरोनावायरस महामारी की वजह से इसके खत्म होने के बाद  भी रियल इस्टेट की कीमतें 20% गिर सकती हैं और इसमें कमी भी आ सकती है। प्रॉपर्टी के भाव 10 या 15 फ़ीसदी कम होंगे लेकिन 20 फ़ीसदी कमी के लिए खुद को तैयार रखना चाहिए। आने वाले समय में घर खरीदने के लिए बेहतरीन समय हो सकता है भविष्य के लिहाज से देखें तो रियल स्टेट के रूप में दोनों को मिलकर अकेले ज्यादा बड़ी है। भारत में रियल एस्टेट मार्केट पहले ही कई वजहों से दबाव में गुजर रहा है ,इसकी वजह बहुत सारी हैं जिसमें नकदी की उपलब्धता न होना ,एन, पी ,ए, का बढ़ना और कुछ सेग्मेंट मे वित्तीय दबाव का बढ़ना जैसे मामले शामिल हैं ।
हाल में ही सरकार ने सस्ते घरों को बढ़ावा देने के लिए बहुत से प्रावधान किए हैं लेकिन उसके बाद भी रियल इस्टेट सेक्टर लगातार मुसीबतों के दौर से गुजरता जा रहा है  हम कह सकते हैं कि  रियल स्टेट पर कोविड-19 का काफी नकारात्मक असर पड़ा है।


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