ग़ज़ल

 



तेरी चाहत मुहब्बत आरज़ू करता है दिल मेरा। 
तेरी यादों से हर पल गुफ्तगू करता है दिल मेरा। 
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नहीं दरक़ार अब कोई ज़माने भर की ख़ुशियों से। 
नहीं तुझसे कोई शिक़वा गिला करता है दिल मेरा!
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फ़ासला बेवज़ह ऱिश्तों के दरमियाँ जो होती है!
उसे झूठी  तसल्ली  से रफ़ू करता है दिल मेरा। 
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तुम्हारी चाहतों का इस क़दर जादू चला मुझ पे। 
अकेले में ही तुझसे गुफ़्तगू करता है दिल मेरा। 
***
चला खंज़र जो अपनों का बहुत ही वार गहरा था। 
हौसलों के ही धागे से रफू करता है दिल मेरा।
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मेरी हर सांस हर धड़कन पे तेरा नाम लिखा है। 
तभी तो बस तुम्हारा जुस्तजू करता है दिल मेरा। 
***
हुए नासूर ज़ख़्मों को सनम अब तो हवा न दो। 
तुम्हारी बेरुख़ी अश्क़-ए-लहु करता है दिल मेरा।


#मणि बेन


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