बिना मुहूरत जनमैं प्राणी

 


बिना मुहूरत जनमैं प्राणी,
बिना मुहूरत मरि जाला।
फिर भी देखा दुनियां सारी,
शुम मुहूरत पाछे पगलाला।।


बात पते की कहला भईया,
सब तबौ मूहूरत देखवावैला।
कइसे राजा बनी बेटउवा ,
नवग्रह शांनत करवावैला।।


विथि कै लेखा मेटि सके को,
ना इतना कूबत केहु में बा।
केतनो पूजा पाठ करउबा ,
जे होनी है उ त होखत बा ।।


कहैं अनुज का लेकर अइला,
का लेकर तू जइबा बबुआ।
जनम भरे क करम कमाई,
सब लुटि जईहैं गठरी बटुवा।।


अब एकै रस्ता बा सस्ता,
जप रामनाम हर सांस करा।
खुदौ तरा औ कुल के तारा,
औ भवसागर से पार परा ।।


सुरेन्द्र दुबे


 



(अनुज जौनपुरी)
kavyamalakasak.blogspot.com


Popular posts
अस्त ग्रह बुरा नहीं और वक्री ग्रह उल्टा नहीं : ज्योतिष में वक्री व अस्त ग्रहों के प्रभाव को समझें
Image
गाई के गोवरे महादेव अंगना।लिपाई गजमोती आहो महादेव चौंका पुराई .....
Image
परिणय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
Image
सफेद दूब-
Image
भोजपुरी भाषा अउर साहित्य के मनीषि बिमलेन्दु पाण्डेय जी के जन्मदिन के बहुते बधाई अउर शुभकामना
Image