अपने के कविजी काहाता

 



पेटवा मे बा गाद बईठल
उपरा खुबे मुसकियाता
लय छन्द बुझाते नईखे
अपने के कविजी काहाता।


दुई अछरिया उलटिके का पढनी
तुकबंदी में माहटर कहवावल जाता।
अपने.....


खाद बथुआ कुछऊ लिखाए
खुबे कुदी फेसबुकवा में डालाता
दु आमदी लोग बधाई का दिहले
फुली के मुहवा तुमा हो जाता ।
अपने......


चमचईके हद हो गईल इहवा पिछे घूमीके
 ठिकेदारन के पाईटा फिचाता।अपने...


सवख खुबे रहे हमरो,समेलनवामे जईति
माईभाखा मे कविता पढती 
पहिलही मन घबराता,जाते उहा मोबाईले निकलता।
अपने के ...


हमार बाप दादा हाथी का रखले हाथमे सिकर ढोआता
मंचपे चढते लंबा-लंबा ढिंग हाकाता।
अपनेके...


पहिले हम सुनले रहनी
छेछरपन राजनीतिमे रहे
अब साहित्योमे बा जातियाता
अपनेके साहित्य परेमी  काहाता।
अपने के ....


कुछऊ दुई लाईन लिखीके सोसल  मे डालाता
शेयर लाइक कमेन्ट ला गोर परिया होई जाता।
अपने के....


मंच जाए पहिले  जान्हवा थरथराता
मोबाईलले बारें मुरी गरले
बोली हकबकाता
सोसल मिडियामें लोगका जनले
पुरस्कारला भीतरे जी ललचाता
अपने के....


दुई-चार लोगनसे तहरा बात का होला
अपने के भाखा के ठिकेदारे काहाता
"साधु"के बतिया पर खुबे फरफराता।
अपने से अपना नामवामे कविजी लिखाता।।


शैलेन्द्र कुमार साधु 
पं०महेन्द्र मिश्र के मिश्रवलिया जलालपुर, सारण ,बिहार 
संपर्क-9504971524


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