शनि-चंद्र के विष योग से बचने के उपाय-

 



पं वेद प्रकाश तिवारी ज्योतिष एवं हस्त रेखा विशेषज्ञ


विष योग चूंकि चंद्रमा और शनि की युति के परिणामस्वरूप बनता है तो ऐसे में चंद्रमा और शनि के इस दोष को शांत करने के लिये निम्न उपाय करने चाहिये –


▪ प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव का अभिषेक करें और धतूरे का फल चढ़ाएं फल चढ़ाते वक्त भगवान से आराधना करते हुए कहा कि जिस तरह पूरे संसार का विष आपने अपने कंठ में धारण कर लिया था मैं अपने जीवन में ग्रहों के कारण आए विष को आपको अर्पित करता हूं।


▪पीपल के पेड़ में अनेक देवी-देवताओं का वास माना जाता है। इसलिये धार्मिक दृष्टि से इसका बहुत अधिक महत्व होता है। विष योग से बचने के लिये भी पीपल वृक्ष के नीचे नारियल को सात बार अपने सिर से वार कर फोड़ना चाहिये और इसे प्रसाद रूप में वितरित करना चाहिये। इससे उपाय से विष योग के नकारात्मक प्रभाव से आप बच सकते हैं। पीपल के वृक्ष पर प्रतिदिन जल चढ़ाएं।


▪शनिदेव को प्रसन्न करने के लिये शनिवार का दिन बहुत ही अहम माना जाता है यदि यह दिन शनि अमावस्या का हो तो और भी बेहतर रहता है। शनिवार या शनि अमावस्या के अवसर पर संध्या बेला में जब सूर्य अस्त हो चुका हो तो उस समय शनिदेव की प्रतिमा या फिर उनके शिला रूप पर तेल चढ़ाना चाहिये। सरसों के तेल में काली उड़द व काले तिल डालकर उसका दिया जलाना चाहिये। शनिदेव के बीज मंत्र ॐ शं शनैश्चरायै नम: का जाप करते हुए मंत्र के प्रत्येक अक्षर को आक के पत्तों पर काजल व सरसों के तेल से बनी स्याही से लोहे की कील से अलग-अलग पत्तों पर लिखें। यह दस आक के पत्तों पर लिखा जायेगा। तत्पश्चात इन पत्तों को काले धागे से बांधकर माला रूप में शनि प्रतिमा या शिला पर अर्पित करें।


▪शनि मंदिर में गुड़, गुड़ से बनी रेवड़ी, तिल के लड्डू आदि का प्रसाद चढ़ाने के पश्चात इसे वितरीत करें, गाय, कुत्ते व कौओं को भी प्रसाद डालें। यह भी विष योग के विषाक्त प्रभावों को कम करने का कारगर उपाय माना जाता है।


▪पानी से भरे घड़े का शनि या हनुमान मंदिर में दान करना भी विष योग से पीड़ीत जातक को राहत देने वाला माना जाता है।


▪पूर्णमासी के दिन भगवान शिव शंकर के मंदिर में रूद्राभिषेक करवाने से भी विष योग का प्रभाव कम हो सकता है।


▪महामृत्युंजय मंत्र का जाप हर प्रकार के कष्ट से बचने में सहायता करता है। विषयोग के प्रभाव से बचने के लिये भी यदि शुक्ल पक्ष में आने वाले पहले सोमवार को रूद्राक्ष माला से कम से कम पांच माला इस मंत्र का जाप किया जाये तो विषयोग के प्रभाव से बचा सकता है।


▪माता-पिता व घर के बड़े बुजूर्गों के आशीर्वाद से भी हर विपदा का सामना किया जा सकता है। विषयोग के प्रभाव से बचने के लिये नित्य यह नियम अपनायें कि आपको अपने माता-पिता सहित बड़े बुजूर्गों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेना है। इससे भी आप विषयोग के प्रभाव को कम कर सकते हैं।


▪शनिवार के दिन यदि कुंए में दूध अर्पित करें तो इससे भी शनि की कृपा प्राप्त होती है। विष योग का प्रभाव कम होने की मान्यता भी इस उपाय से जुड़ी है।


▪भगवान बजरंग बली हनुमान जिन्हें संकच मोचन भी कहा जाता है इनकी पूजा से भी विष योग से बचा जा सकता है। इसके लिये किसी भी हनुमान मंदिर में या फिर घर के पूजा स्थल में हनुमान जी की प्रतिमा के समक्ष शुद्ध घी का दिया जलाकर अपने गुरु व भगवान श्री हनुमान का आह्वान करते हुए कम से कम 49 पाठ सुंदरकांड के किये या करवाये जायें तो विषयोग को निष्प्रभावी किया जा सकता है।


▪भगवान श्री हनुमान जी को शुद्ध घी व सिंदूर बहुत प्रिय माने जाते हैं अत: मान्यता है कि घी व सिंदूर का चोला चढ़ाकर हनुमत प्रतिमा के दांये पैर के सिंदूर को मस्तक पर धारण किया जाये तो विष योग जैसे हर कष्ट से बचा जा सकता है।


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