साहित्यिक पंडा नामा:६३४

 



देश-द्रोहियों के निशाने पर ब्राह्मण  ही क्यों होता है हमेशा? मैंने पढ़ा है किअम्बेडकर ने अंग्रेजों से अपील की थी कि अंग्रेज भारत से यह समझौता करें कि भारत में यदि पिछड़ों के ऊपर सवर्ण अत्याचार करे तो इंग्लैंड भारत पर कोई कारवाई करने में सक्षम हो। आखिर विदेशियों से भी हाथ मिलाने में जिन्हें हिचक नहीं थी, भारतीय समाज उनके गुणगान में व्यस्त क्यों?
दलित,विधर्मी,कम्युनिस्ट,सेकुलर हिन्दू के आक्रमण का निशाना 'ब्राह्मण' क्यों होता है?क्या ब्राह्मण के बाद के हिन्दू से उन्हें प्रेम है या वे उनके शुभचिंतक हैं? हकीकत यह है कि उनको न तो ब्राह्मण से कोई द्वेष है और ना कोई तकलीफ उनको हिंदू मात्र से द्वेष है। वे जानते हैं कि यदि ब्राह्मण न रहा, तो हिंदू मिट जाएगा ।धर्म को बनाए रखने में सर्वाधिक बलिदान ब्राह्मणों ने दिया है। बजाय उनका सम्मान करने के पालने में मानस विष घोला जा रहा है और लोगों को बरगलाया जा रहा है। ब्राह्मण का सांस्कृतिक और भौतिक जीनोसाइड किया जा रहा है।
हिन्दू को मिटाने की यह उनकी चाल है।चूंकि सनातन की वर्ण-व्यवस्था में ब्राह्मण का दायित्त्व सीधे धार्मिक कृत्य से है।वह हिन्दू धर्म का वाहक है।जब उस पर निशाना लगेगा,तब अन्य सब भरभराकर गिर जाएंगे।
ब्राह्मण कोई 'वाद' नही है।वाद नास्तिक,विध्वंसकारी,
भोगवादी अवधारणा है ,जो ब्राह्मणत्व के  उच्चतम भाव को नष्ट करने को कटिबद्ध है। उन्हें यह पता है कि हिन्दू धर्म की कुंजी  ब्राह्मण के पास है।जागो,भारत,जागो!!


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