पुस्तक समीक्षा : काव्य संग्रह जागो यार दुनिया तुम्हारी है

 



प्रसिद्ध साहित्यकार आदरणीय आशुतोष कुमार सर ने काव्य संग्रह जागो यार दुनिया तुम्हारी है उपहार स्वरुप मुझे भेंट की।इस पुस्तक में कुल पच्चास रचनाएँ शामिल हैं।जिनमें से पच्चीस रचना आदरणीय आशुतोष सर द्वारा लिखित हैं एवं पच्चीस रचना आदरणीय ओट्टेरी सेल्वा कुमार सर द्वारा लिखित हैं।


इस काव्य संग्रह की जितनी सराहना व प्रशंसा की जाए कम है।एक से बढकर एक सुंदर रचनाओं का संग्रह है इस पुस्तक में।सभी रचनाएँ जीने की नई राह दिखाती हैं और समाज को सार्थक संदेश प्रदान करती हैं।


पुस्तक के प्रारंभ में आदरणीय आशुतोष सर जी का परिचय शामिल हैं।जिनसे हमें उनके विषय में जानकारी प्राप्त हुई।उसके पश्चात उनकी पच्चीस रचनाओं को पढ़ने का स्वर्णिम अवसर प्राप्त हुआ।उनकी सभी रचनाएँ मुझे बेहद पसंद आईं।उन रचनाओं में से कुछ रचनाओं का जिक्र मैं करना चाहूंगा।-----
◆जागो इन्सा प्यारे-इस रचना द्वारा आदरणीय आशुतोष कुमार सर ने सभी को सार्थक संदेश देने का प्रयत्न किया है।रचना के माध्यम से इन्होंने बताने का प्रयास किया है कि आज हर कोई यह कह रहा है कि जाति मजहब से दूर सर्वप्रथम हम इंसान हैं।परंतु सभी के दिलों में कहीं न कहीं नफरत है आक्रोश की भावना है।ऐसी स्थिति में भला सबकुछ बेहतर कैसा होगा।महापुरुषों ने अपने प्राण की आहुति दी है हमें आजादी दिलाने के लिए।हमें यह नहीं भूलना चाहिए।यह काव्य रचना वाकई में बेहतरीन है।
◆उबलता लहू-इस काव्य रचना के माध्यम से आदरणीय आशुतोष कुमार सर ने आज की सच्चाई हमारे समक्ष प्रस्तुत की है।हम एक ऐसे देश में रह रहें हैं जहाँ नारी की पूजा की जाती है।और एक सच्चाई यह भी है कि यहाँ दुराचारियों की भी कमी नहीं है।नारी को अपमानित और प्रताडित करने वाले दुराचारियों को सबक सिखलाना नितांत आवश्यक है।रचना के माध्यम से नारी का हौसला बढ़ाते हुए लिखा गया है कि जागो तुम भी जननी 
                                                     अपनी अबला की पहचान छोडो।
◆ऐ मन-मन के ऊपर लिखित यह रचना वास्तव में बेहद उत्कृष्ट रचना है।एक मन है और इसके अंदर अनगिनत इच्छाएँ अंकुरित होती रहती हैं।मन सचमुच बेहद चंचल है।इस कविता की ये पंक्तियाँ मुझे बेहद अच्छी लगी--
ऐ मन,तू मधुर एहसास मेरी
कड़वी से कड़वी सच्चाई
एक मन,लाखों इच्छाएँ तेरी
इसलिए जीवन की दवाई मेरी।
◆प्रदुषण का कहर-इस कविता द्वारा वातावरण में बढ़ते प्रदूषण पर गहरी चिंता जाहिर की है रचनाकार जी ने।आज प्रदूषण इतना ज्यादा बढ़ चूका है कि इंसान का जीना मुश्किल है।जल प्रदूषण,वायु प्रदूषण अत्यधिक बढ़ रहें हैं जिनसे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है।बढ़ते प्रदूषण की वजह से सभी को अनगिनत कठिनाई झेलनी पड़ रही है। रचना के माध्यम से सार्थक संदेश दी गई है।
◆गरीबी-गरीबी इस काव्य रचना द्वारा गरीब और बेसहारों की दशा व्यक्त की गई है।सचमुच गरीबों को असहनीय दर्द सहन करना पड़ता है।हम भले ही उनके दर्द का कुछ हिस्सा रचनाओं के माध्यम से लिख दें पर उनका दर्द कम हो उसके लिए हम सभी कार्य नहीं करते हैं।हमें बेसहारों के लिए कुछ करना चाहिए।यथासंभव उनकी मदद करनी चाहिए।बारिश के दिनों में कंपकपाती ठंड के दिनों में बहुत कष्ट सहन करनी पड़ती है गरीबों को इस रचना के माध्यम से यह बखूबी दर्शाया गया है।
◆बचपन की शरारत-बचपन की शरारत रचना बचपन की याद दिलाती है।बचपन के दृश्यों को प्रदर्शित किया है इस रचना के माध्यम से।बचपन कभी नहीं लौटता है दुबारा।बचपन में किए गए शरारतें सदैव स्मरण रहती है।
◆करची की कलम-करची की कलम कविता मुझे अत्यंत प्रिय लगी।करची की महत्ता पर विशेष प्रकाश डाला गया रचना के अंतर्गत।करची की व्यथा का बखूबी वर्णन किया गया है।
◆सुन्दर झारखंड-इस रचना के माध्यम से झारखंड की खूबसूरती का वर्णन किया गया है।झारंखड की प्राकृतिक छटा का खूब वर्णन किया गया है रचना के अंतर्गत।



आदरणीय ओटेरी सेल्वा सर जी द्वारा लिखित रचनाएँ भी बेहद उत्कृष्ट हैं।मुझे इनकी पच्चीस रचनाओं में जो अत्यंत प्रिय लगी उन रचनाओं का जिक्र मैं करना चाहूंगा---
◆नया साल-नया साल रचना बेहद उत्कृष्ट रचना है।नया साल में भला क्या होता है।केवल तिथि और माह ही बदलते हैं।रचना के माध्यम से सार्थक संदेश प्रस्तुत किया गया है।
◆यह सच है-एक झूठ को छीपाने के लिए सौ झूठ बोलनी पड़ती है यह बिल्कुल सच है।जीवन कठिन है क्योंकि हम इसे जरुरत से ज्यादा गंभीरता से लेते हैं।रचना वाकई में सुंदर संदेश प्रदान करती है।



✍️कुमार संदीप
ग्राम-सिमरा
पोस्ट-श्री कान्त
जिला-मुजफ्फरपुर
राज्य-बिहार


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