शावर भकत " भवानी " : साहित्यिक परिचय

 



नाम- शावर भकत "भवानी"


पति का नाम- श्री असित कुमार भकत
 ( भारतीय नौसेना में कार्यरत)
पिता का नाम-श्री जगदीश चन्द्र चौधरी
माता का नाम- स्व.गीता चौधरी
जन्म स्थान -राजमहल,( झारखंड)
जन्म तारीख-२२.०८.१९८१
शैक्षणिक योग्यता---- एम ए (इतिहास)
निवास स्थान- ढकुरिया , कोलकाता, (पश्चिम बंगाल)
व्यवसाय--- ट्यूटर, कवयित्री, लेखिका, शायरा
Mail id---- showerbhakat@gmail. com


लेखन विधा---- कविता,ग़ज़ल, हाइकु,मुक्तक, क्षणिका, कतअ,  वर्ण पिरामिड, कुछ छंद,लघुकथा, कहानी ,आलेख ,संस्मरण ,यात्रावृत्तांत एवं गद्य विधा।


एकल पुस्तक --- "अरूणोदय" ( काव्य संग्रह)प्रकाशित (साल २०१९)


 रचना प्रकाशित - 


हिंदी सागर महिला विशेषांक, हिंदी सागर त्रैमासिक ,नारी शक्ति सागर , कई बार आलेख प्रकाशित क्राइम ऑफ़ नेशन पत्रिका में,गुफ़्तगू पत्रिका में ग़ज़ल , जीवन प्रभात में,
 साहित्य सन्दल साझा संग्रह, भाषा सहोदरी लघुकथा साझा संग्रह, शीर्षक परिषद शब्द कलश साझा संग्रह, स्त्री एक सोच साझा संकलन(श्री सत्यम प्रकाशन),  उड़ान शब्दों की (श्री सत्यम प्रकाशन), संगम लघुकथा साझा संग्रह,
काव्य पुंज (साहित्यदीप महाकुंभ साझा काव्य संग्रह), नदी चैतन्य, हिंद धन्य साझा संग्रह ,लघुकथा कलश तृतीय में लघुकथा प्रकाशित, आगमन समूह के नीलाम्बरा साझा संग्रह में,आगमन प्रेम विशेषांक पत्रिका में लघुकथा, समय सुरभि अनन्त पत्रिका में आलेख, संगिनी पत्रिका में लघुकथा ,विभिन्न ई पत्रिका में भी रचनाएँ प्रकाशित , लघुकथा कलश रचना प्रक्रिया विशेषांक में, विभिन्न पत्रिकाओं में,
इत्यादि।एक एकल काव्य संग्रह प्रकाशित एवं विभिन्न अखबारों में रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं।


रचना प्रकाशनाधीन-


जे एम डी पब्लिकेशन की पत्रिका, विभिन्न प्रकार की पत्रिकाओं में कविताएँ , भारत माता की जय,   पुस्तक, रचनाएँ विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशनाधीन। जय नदी जय हिंद साहित्यिक समूह की दूसरी साझा संग्रह पुस्तक में रचनाएँ प्रकाशनाधीन।
 


सम्मान----


Aagman Pride of women अवार्ड 


            जय नदी जय हिंद साहित्यिक समूह की दूसरी साझा पुस्तक प्रकाशनाधीन, सम्पादक


            अरूणोदय एकल काव्य संग्रह  को भारतीय नौसेना के कोलकाता शाखा के शिप्स लाइब्रेरी में स्थान 


           अरूणोदय एकल काव्य संग्रह को भारतीय नौसेना के ईस्टर्न कमांड विशाखापत्तनम के कमांड लाइब्रेरी में स्थान।


         नदी चैतन्य, हिंद धन्य साझा पुस्तक की सम्पादक


नदी चैतन्य, हिंद धन्य साझा संग्रह  को भारतीय नौसेना के कोलकाता शाखा के शिप्स लाइब्रेरी में स्थान 


नदी चैतन्य,हिंद धन्य साझा संग्रह को भारतीय नौसेना के ईस्टर्न कमांड विशाखापत्तनम के कमांड लाइब्रेरी में स्थान।
           
       साहित्यिक समूह जय नदी,जय हिंद की संस्थापिका/अध्यक्षा


             हिंदी सागर सम्मान


            प्रतिभाशाली रचनाकार सम्मान


   (विश्व हिंदी लेखिका मंच)मासिक काव्य  प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ  कवयित्री सम्मान


       नारी शक्ति सागर सम्मान


   शहीद गौरव सम्मान ( विश्व हिंदी रचनाकार मंच)


   मातृभूमि सम्मान ( विश्व हिंदी रचनाकार मंच )


     भागीरथी सम्मान(जय नदी,जय हिंद समूह)


             सम्पादक नारी शक्ति सागर पत्रिका


              सम्पादक हिंदी सागर पत्रिका


             विश्व हिंदी रचनाकार मंच द्वारा शहीद स्मृति सम्मान हेतु चयन।     
       
            विभिन्न साहित्यिक समूहों में दैनिक प्रतियोगिता में कई बार सर्वश्रेष्ठ रचनाकार सम्मान           एवं सर्वश्रेष्ठ टिप्पणीकार सम्मान कई बार
--------------------------------------------------------------


एकल काव्य संग्रह अरूणोदय की कविता


काश टाइम मशीन से भूत में जा सकती तो
--------------------------------------------------
श्वासों का श्वासों से 
संवाद स्वर सदृश है काश।
अदृश्य पहलुओं का
 शाब्दिक दृश्य है काश।


काश जीवन वर्तमान से
 भूतकाल में प्रवेश करे और
यौवनता के मधुरतम पलों को
 तुम्हारे संग बिता लूँ।


नैनों की निःशब्दता में 
सर्वस्व उजागर हो जाए।
अधरों की उष्णता में 
तुम्हें महसूस करती।


एक दूसरे के मौन शब्दों को
 स्पष्ट पढ़ लेते और 
  रोम रोम तुम्हें और सिर्फ़ तुम्हें
 अनुभव करते।


अधूरी इच्छाओं को 
सम्पूर्णता दे पाती।
शर्म,रीति रिवाजों से परे 
  प्रेम नवगीत सुनाती।


दिल के अधूरे एहसास में
तुम्हें सम्पूर्ण नाम देती।
 तुम पुरुष हो इसलिए निःसंकोच
अपने एहसास बोल दिए।
लेकिन मैं हाँ मैं प्रकृति सदा से
 संकोच ,लज्जा बेड़ियों में उलझी।


भावनाशून्य न होते हुए भी 
भावनाशून्य बनी रही।
प्रेम समय अधीन न होते हुए भी 
पूर्णतः स्वाधीन भी नहीं।
बंधनमुक्त होकर भूत में मिल लूँ
सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी बन जाऊँ।


समय को अनुरोध करके बोल पाती
 काश!भूत से वर्तमान में वापस न आऊँ।
काश! प्रेम काल के अधीन न होता तो
शायद मैं तुम हम में परिणत होते और
प्रेम स्वीकृति के पराधीन नहीं होता और
टाइम मशीन से काश युक्त न होता।


अंतस टिस कहने को विवश न होते कि,
काश टाइम मशीन से भूत में जा सकती तो --------



शावर भकत " भवानी "
कोलकाता


Popular posts
अस्त ग्रह बुरा नहीं और वक्री ग्रह उल्टा नहीं : ज्योतिष में वक्री व अस्त ग्रहों के प्रभाव को समझें
Image
ठाकुर  की रखैल
Image
गाई के गोवरे महादेव अंगना।लिपाई गजमोती आहो महादेव चौंका पुराई .....
Image
पीहू को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं
Image
भोजपुरी भाषा अउर साहित्य के मनीषि बिमलेन्दु पाण्डेय जी के जन्मदिन के बहुते बधाई अउर शुभकामना
Image